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VOL. 4, ISSUE 5 (2017)
भारत में महिला सशक्तिकरण : एक विवेचना
Authors
बृजेश कुमार यादव
Abstract
किसी भी राष्ट्र के निर्माण में उस राष्ट्र की आधी आबादी (स्त्रि) की भूमिका की महत्ता से इनकार नहीं किया जा सकता। आधी आबादी किसी भी कारण से निष्क्रिय रहती है, तो उस राष्ट्र या समाज की समुचित एवं उल्लेखनीय प्रगति के बारे में कल्पना भी नहीं की जा सकती। महिलाओं की स्थिति वैदीक एवं उत्तर वैदीक काल तक ठीक थी परन्तु मध्यकाल अति-अति समाज में ब्याप्त अनेक कुरीतियों ने स्त्रियों की स्थिति को अधिक बदतर कर दिया। वाह्य आक्रमणकारीयों, अन्तर देशीय व्यापार, मूगल शासन, केन्द्रीय सत्ता का विनष्ट होना और शासको की विलासीता पुर्ण पद्धति ने महिलाओं को उपयोग की वस्तु बना दिया जिससे उनकी स्वतन्त्रता, शिक्षा तथा उनके अधिकार बाधित होने लगे। जिसके कारण अनेक कुरीतियाँ व्याप हो गयी। महिलाओं के इन स्थितियों के दूर करने तथा उनको मुख्यधारा से जोड़ने के लिए स्वतन्त्रता पूर्वक अनेक समाज सुधारकों तथा महिला संगठनों ने अनेक प्रयास किये जिसके परिणाम स्वरूप सति प्रथा पर रोक, विधवा पूर्वविवाह इत्यादि फुरीतियाँ दुर हुई। स्वतन्त्रता पश्चात महिला सशक्तिकरण के लिए अनेक सवैधानिक प्रयास, कल्याणकारी योजनाओं तथा नीतियों महिलाओं मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
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Pages:274-277
How to cite this article:
बृजेश कुमार यादव "भारत में महिला सशक्तिकरण : एक विवेचना". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 4, Issue 5, 2017, Pages 274-277
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