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VOL. 4, ISSUE 5 (2017)
बालपत्रों के भाषाई स्वरूप का अध्ययन
Authors
शिवांगी
Abstract
आधुनिक युग में जनसंचार माध्यमों का विशेष महत्त्व है। जनसंचार के विविध माध्यमों जैसे रेडियो, टेलीविजन व समाचार पत्रों के बिना आज के समय में काम चलाना नामुमकिन तो नही परंतु मुश्किल अवश्य प्रतीत होता है। जनसंचार माध्यम भी इस बात से भली-भांति परिचित हैं और अपने पाठक व दर्शक वर्ग की रूचियों व आवश्यकताओं को देखते हुए उपयुक्त सामग्री का प्रचार प्रसार व प्रकाशन करते हैं। जनसंचार माध्यम का प्राचीन एंव प्रतिष्ठित साधन होने के कारण सामाचार पत्र भी इसका अपवाद नहीं हैं यही कारण है कि हमें समाचारपत्रों में आजकल महिलाओं व बच्चों के लिए विशिष्ट अंकों का प्रकाशन देखने को मिलता है। देश के कुछ प्रमुख हिन्दी समाचारपत्र बच्चों के लिए विशिष्ट रूप से उपयोगी बालपत्रों का प्रकाशन सप्ताह में एक दिन करते हैं जिनमें बच्चों की रूचि, मनोरंजन भाषा, साहित्य व कौशलों के विकास के समुचित सामग्री का प्रकाशन किया जाता है। ये बाल समाचारपत्र बालकों में साहित्यिक अभिरुचि विकसित करने के साथ-साथ भाषा संबंधी कौशलों जैसे-लिखने व पढने का विकास करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समाचार-पत्रों के भाषाई शिक्षण व अधिगम में इन्हीं उपयोगों को देखते हुए एवं सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि पर विचार करते हुए इस शोध में बच्चों के लिए उपयोगी समाचार-पत्रों को विश्लेषित करने का विचार मेरे मन में आया। इस अध्ययन में पाया गया कि बाल समाचारपत्र भाषा के सुन्दर नमूने पेश करते हैं बच्चों के पठन-कौशलों के विकास में अखबारों का महत्त्वपूर्ण योगदान हो सकता है। बालक सैद्धान्तिक रूप से ही नहीं वरन् व्यवहारिक जीवन में प्रयोग किये जाने वाले शब्दों को सीख सकते हैं। अखबार में विषय-वस्तु के अनुरूप भाषा का प्रयोग होता है जिसे पढ़कर बच्चे सन्दर्भानुसार भाषा प्रयोग से अवगत होते हैं। समाचार-पत्र बच्चों को भाषा के नमूने उपलब्ध कराते हैं। बालसुलभ कौशलों का विकास होने से लेखन कौशल पर भी असर पड़ता है। समाचार-पत्रों से बच्चों का शब्द-कोश भी विस्तृत व संवर्द्धित हो जाता है। उनके व्यक्तिगत शब्द-कोश में नए शब्दों का समावेश होता रहता है। इन अखबारों में भाषा के विविध प्रयोग होते हैं जिनसे बच्चे परिचित होते हैं वहीं दूसरी और विकृत भाषा प्रयोग के उदाहरण भी इनमें देखने को मिलते है।
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Pages:294-298
How to cite this article:
शिवांगी "बालपत्रों के भाषाई स्वरूप का अध्ययन". International Journal of Multidisciplinary Research and Development, Vol 4, Issue 5, 2017, Pages 294-298
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